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Shatrunjay Tirth Mahima

SHRI SHATRUNJAY MAHATIRTH

शत्रुंजयगिरि की
महा महिमा

  • इस तीर्थ में ध्यान करने से - 1000 पल्योपम, अभिग्रह धारने से - लाख पल्योपम? इस तीर्थ की अोर चलने से एक सागरोपम जितने पाप कर्म नष्ट होते है।
  • इस तीर्थ पर नवकारशी करने से - 2 उपवास का लाभ मिलता है।
  • पोरसी करने से - तीन उपवास का लाभ मिलता है।
  • पुरिम़ड्ढ करने से - चार उपवास का लाभ मिलता है।
  • एकासना करने से - पांच उपवास का लाभ मिलता है।
  • आयंबिल करने से - 27 उपवास का लाभ मिलता है।
  • उपवास करने से - तीस उपवास का लाभ मिलता है। (शत्रुंजय कल्पवृत्ति)
  • इस तीर्थ पर धूप करने से - 15 उपवास का लाभ अौर कपूर का धूप करने से - मासखमण का लाभ होता है। (शत्रुंजय कल्पवृत्ति)
  • शत्रुंजय तीर्थ के दर्शन-पूजन से 30 उपवास का लाभ मिलता है।
  • तलहटी में एक प्रहर जागरण करने से छः महिने के उपवास का लाभ मिलता है।
  • शत्रुंजय तीर्थ की छट्ठ करके सात यात्रा करने से तीसरे भव में मोक्ष प्राप्त होता है।
  • चैत्री पूर्णिमा के दिन 10, 20, 30, 40 अौर 50 पुष्पों की मालाए चढाने से क्रम के अनुसार 1, 2, 3, 4, 5 उपवास का लाभ होता है। (उपदेश प्रसाद सा. 13)
  • सुबह में जागरण के साथ ही शत्रुंजय की स्तुति करने से सभी पापों का नाश होता है।
  • अन्य तीर्थों की हजारों यात्राएँ करने से जितना पुण्य मिलता है उतना पुण्य इस तीर्थ की यात्रा करने से मिलता है। (उपदेश-प्रसाद)
शेत्रुंजी नदीए नाहीनेमुख बांधी मुख कोशदेव युगादी पूजीएआणी मन संतोष

ऐसे सिद्धाचल की यात्रा करने का सद्भाग्य हमें प्राप्त हुआ है,

यह हमारे उज्ज्वल भाग्य का जीवंत प्रमाण है, इसीलिए तो पं. श्रीवीरविजयजी म. सा. ने 99 प्रकारी पूजा में कहा है कि –

“चौद क्षेत्रमां हां रे त्रण भुवन मां तीरथ नहिं एवो, सनेही संत ए गिरि सेवो।”
हमारा अहोभाग्य है कि हमारा जन्म ऐसे प्रगट प्रभावक तीर्थ के समीप हुआ है।

हमें तो ऐसा सिद्धाचल मिला है कि हम आदर, अहोभाव एवं असीम शुभ भावना से जितनी बार उसकी स्पर्शना करेंगे उतनी बार अपने अनंतानंत भवों के अशुभ कर्म इस गिरिराज के प्रभाव से ही नष्ट हो जाएंगे।

तो आईये, अब तक भले ही अज्ञान अवस्था के कारण हम गिरिराज की महानता के विषय में अनभिज्ञ रहें हैं, परंतु अब तो हम इसकी महिमा से परिचित हुए है तो अब चुके नहीं –

हमारा परिवार आपसे विज्ञप्ति कर रहा है कि – हमें आजतक जो परिवारजन, स्नेही, संबंधी एवं कल्याणमित्र प्राप्त हुए हैं – सब पूर्व भवों के ऋणानुबंध के कारण ही मिले हैं।

तो… तो अब आत्मा के हित के लिए, आपके हस्त कमलो में आये हुए अमूल्य अवसर का स्वागत करें और हर्षोल्लासपूर्वक इस यात्रा में शामिल होने पधारें।

ऐसे सिद्धाचल की यात्रा करने का सद्भाग्य प्राप्त करे