Lodaer Img

Importance of Tirth Yatra

CHARI PALIT YATRA

तीर्थयात्रा की महत्ता

कलिकालसर्वज्ञ श्री हेमचंद्रसूरीर्श्वरजी महाराजा ने कुमारपाल भूपाल को तीर्थयात्रा की महत्ता समझाते हुए कहा है कि -

स्पर्शना फल

श्री नंदीश्वर तीर्थ की यात्रा से, दुगुना लाभ श्री कुंडलगिरितीर्थ यात्रा, उससे तीनगुना लाभ रूचकगिरियात्रा, उससे चारगुना लाभ गजदंतगरि, उससे दुगुना लाभ जंबूवृक्ष चैत्य, उससे छःगुना लाभ धातकी वृक्ष चैत्य, उससे बारहगुना लाभ पुष्करवृक्ष चैत्य, उससे 100 गुना लाभ मेरुचूला चैत्य, उससे 1000 गुना लाभ सम्मेतशिखर यात्रा, उससे लाखगुना रैवतगिरि, उससे करोडगुना श्री शत्रुंजय की यात्रा में लाभ…

छ’री पालक यात्रा संघ के11 महान लाभों का शास्त्रीय वर्णनछ’री पालक यात्रा संघ के11 महान लाभों का शास्त्रीय वर्णन
Image

01

आरंभ-समारंभ की निवृत्ति

Image

02

धन की सफलता

Image

03

श्रेष्ठ संघवात्सल्य

Image

04

सम्यग्दर्शन की निर्मलता

Image

05

स्नेही-स्वजनों का हित

Image

06

जीर्ण - चैत्य उपाश्रयादि का उद्धार

Image

07

शासन की उन्नत्ति

Image

08

जिनाज्ञा का सम्यक् पालन

Image

09

तीर्थंकर नामकर्म का बंध

Image

10

परमपद मोक्ष का सामीप्य

Image

11

मोक्ष न मिले तब तक इन्द्र-राजा-महाराजा पद की प्राप्ति

श्रावक के 36 कर्तव्यों को दर्शाती फमन्ह जिणाणंफ की प्राकृत सज्झाय में श्रावक के अनेक कर्तव्यों में से तीर्थयात्रा का भी एक महत्वपूर्ण कर्तव्य तीर्थयात्रा जो श्रावक को प्रतिवर्ष करनी चाहिए ऐसा विधान किया गया है। आत्मा को तारने की शक्ति जो रखता है उसका नाम तीर्थ और आत्मा को संसार सागर से पार उतारने के लिए की जाती यात्रा वही है सच्ची तीर्थयात्रा।

तीर्थ स्थानों में घूमने-फिरने या थकान उतारने या हवा बदलने के लिए तीर्थयात्रा नहीं हैं। तीर्थ स्थानों में संसार को भूलने और भूले हुए आत्मा को याद करने जाना होता हैं। परमात्मा की प्रतिमा आत्मदर्शन के लिए दर्पण के समान है। उस दर्पण के सामने देखते ही आत्मा को शुद्ध स्वरूप और वर्तमान का विरूप तुरंत दिख जाता हैं।

ऐसी पवित्र भूमि पर आते ही यात्री के हृदय में भक्ति-भाव और भव से पार उतरने के अवनवे स्पंदन जागृत होने लगते हैं। इस स्पंदनों को जागृत करने के लिए ही तीर्थयात्रा करनी जरूरी है। नियत किये हुए समय में दौडभाग कर के यात्रा करने में यात्रा का कोई आनंद नहीं आता। यात्रा शांतिपूर्ण और भक्तिपूर्ण होनी चाहिए।

जिससे तीर्थंकरो की बहती करुणा का हमे स्पर्श मिले, तीर्थंकरो की गुणसृष्टि का हमे स्पार्क मिले, भक्तिरस से हमारा भौतिकरस अभिभूत हो। यह तीर्थयात्रा हमारी स्मृति का एक जवाहिर बन कर हमारी भवयात्रा का शीघ्र अंत करने वाली बने ऐसी शुभ कामना।

यात्री इस यात्रा का आनंद लूट कर, संसार यात्रा का अंत लाने के महान कार्य में सफलता प्राप्त करे, बस यही एक ही शुभाभिलाषा।